जहां दिल्ली में एक ओर चमचमाती मेट्रो दौड़ती है, Central Vista जैसे futuristic (फ्यूचरिस्टिक) यानि अपनी समय से भी आगे के प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं और प्रदेश के नेता 24 घंटे फ्री बिजली के दावे करते हैं वहीं देश की राजधानी में एक गाँव ऐसा भी जहां लोग लालटेन की लाइट में दिवाली मनाने के लिए मजबूर हैं, बच्चे मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं | इस वर्ष यानि 2022 में भी इस गाँव के 200 लोग, चिराग की रोशनी में दिवाली मनाएंगे |
बात हो रही है देश का दिल कहे जाने वाले राजधानी दिल्ली की, जहां मंत्री, संतरी से लेकर प्रधानमंत्री तक के आवास दिवाली में गुलज़ार होंगे, पर इसी प्रदेश के एक गाँव में आज भी लोग बिजली की एक बत्ती को तरस रहे हैं |
अप्प सोचेंगे ऐसा कैसे हो हो सकता है की देश के सुदूर इलाकाओं के गावों में जब बिजली आ चुकी है, तो दिल्ली जैसे शहर में ऐसा कोई इलाका या गाँव कैसे हो सकता है जहां बिजली न हो |
यह कड़वा है पर सच है, ये गाँव है नरेला विधानसभा क्षेत्र के रजापुर कलां, जहां आज़ादी के इतने वर्ष बाद भी लोगों ने अपने घरों में बिजली नहीं देखि |
ऐसी बात भी नहीं की यहाँ की जनसंख्या कम है या ये कोई झुग्गी बस्ती है, ये एक भरा पूरा गाँव है जिसमें 200 से अधिक लोग रहते हैं, यहाँ पक्के मकान और कुछ कच्ची गलियाँ भी हैं पर बल्ब के आविष्कार के 150 साल बाद भी कई लोग ऐसे हैं जिन्होने जन्म से आज तक कभी इस गाँव में बिजली नहीं देखि |
घर में रोजाना के काम बिना बिजली के लालटेन और Emergency लाइट या बैटरी से चलने वाले लाइट से होते हैं, खाना बनाने के लिए भी मिट्टी तेल के दिये या लालटेन का उपयोग किया जाता है | बच्चे भी अपनी पढ़ाई चिराग की रोशनी में ही करते है, कई छोटे बच्चे ऐसे हैं जिन्होने अपने जन्म से कभी बिजली देखि ही नहीं |
शाम होते ही पूरे गाँव में अंधेरा सा पसर जाता है, कुछ असामाजिक तत्त्व भी दारू पी कर आने-जाने वाले महिलाओं को परेशान करते हैं, और कई बार छिना झपटी के केस भी देखने को मिलते हैं |
सिर्फ बिजली का ही दिक्कत नहीं है, गाँव में कोई शौचालय भी नहीं है और गाँव में नालों की भी व्यवस्था नहीं है, रात के अंधेरे में शौच को जाती महिलाओं के साथ बहुत बार दुर्व्यवहार ही होता है पर रात के अंधेरे में कुछ नहीं दिखने के कारण पता नहीं चल पाता है की किसने किया |
देश की राजधानी में ही बसे इस गाँव में बिजली न होने के कारण लोग मोबाइल चार्जिंग के लिए भी 10-20 रुपय रोजाना खर्च करने को मजबूर हैं |
गर्मियों के दिन में या रात में लोग पेड़ के नीचे बैठ कर समय काटने को मजबूर हैं | वहाँ के लोगों से बात करने पर पाता चल की लोग सालों से अंधेरे में दिवाली मना रहे हैं, प्रकाश के त्योहार पर भी लोग अंधेरे में घुट-घुट कर जीने से परेशान हैं, पर करें भी तो क्या इनकी गरीबी इन्हे कभी इस गाँव से निकलने नहीं देती और यहाँ के अधिकारी, नेता, विधायक और सांसाद इनकी मदद के नाम पर सिर्फ चुनाव के समय आश्वासन देकर चले आते हैं |
अधिकारियों से बात करने पर ये पाता चला की गाँव में बिजली न होने कारण है ” यहाँ पर transformer लगाने के लिए जगह का ना होना है” | पहले एक जगह ट्रांसफार्मर लगाने के लिए जगह चिन्हित की गई थी, लेकिन गांव के लोगों ने वहां ट्रांसफार्मर लगाने पर आपत्ति जताई थी। “, तसवीरों में देख सकते हैं की गाँव में बिजली के खंभे तो हैं पर, खंभों पर तार नहीं हैं |
गाँव के एक व्यक्ति से बात करने पर पाता चला की ये खंभे आज से चार – पाँच साल पहले से लगे हुये हैं पर तब से और कोई काम आगे बढ़ा ही नहीं, उनका कहना है नेता सिर्फ वोट मांगने के लिए यहाँ आते हैं फिर झूठे वादे करके यहाँ से चले जाते हैं, और हम सालों से ऐसे ही जीने को मजबूर हैं, कई बूढ़ों को लगता है की इस जनम मे तो ये कभी भी इस गाँव में बिजली देख भी नहीं पाएंगे |
जहां एक तरफ केजरीवाल साहब दिल्ली में अपने काम के नाम पर हर प्रदेश में वोट मांगते नज़र आते हैं वहीं उनके ही विधायक शरद कुमार के क्षेत्र में बीते कई दशकों से बिजली नहीं आ पाई है | क्या इस गाँव में कभी बिजली आ भी पाएगी या नहीं इस बात को लेकर गाँव के 200 से ज्यादा निवासी हमेशा संशय में रहते हैं, आखिर कब तक राजधानी का ये गाँव ‘रजापुर कलां’ अंधेरे में दिवाली मानता रहेगा ?
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