जीवाश्म ईंधन पर निवेश नहीं करेगा कार्नेल विश्वविद्यालय, वैकल्पिक ऊर्जा प्रोद्योगिकी को देंगे बढ़ावा

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जीवाश्म ईंधन पर केंद्रित निजी निवेशों पर रोक लगाने और वैकल्पिक ऊर्जा प्रोद्योगिकी को बढ़ावा देने का न्यूयार्क की कार्नेल यूनिवर्सिटी (Cornell University )ने निर्णय लिया है। इसके उत्पादन की नई-नई तकनीकों को खोजने को लेकर यूनिवर्सिटी ने 6.9 मिलियन डॉलर निवेश करने का निर्णय लिया है। यह फैसला 22 मई को विश्वविद्यालय के ट्रस्टियों की हुई बैठक में लिया गया है। बैठक में चर्चा के बाद यह तय किया गया कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वैकल्पिक ऊर्जा के उत्पादन को लेकर दीर्घकालिक निवेश किए जाने की जरूरत है। यहां बता दें कि अमेरिका के न्यूयार्क में स्थित यह यूनिवर्सिटी नए-नए शोध किए जाने को लेकर जानी जाती है।
विश्वविद्यालय के मुख्य निवेश अधिकारी केन मिरांडा ने कहा कि दुनियाभर के उद्योग कोयला, तेल और गैस पर निर्भर हैं, जिनकी जरूरत दिन व दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब जरूरत है कि वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाए। दरअसल दुनियाभर के देश जीवाश्म ईंधन से दूरी बना रहे हैं, जबकि अक्षय ऊर्जा स्रोतों को लेकर नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। इस लिए अक्षय ऊर्जा के रूप में नए विकल्प की तलाश की जाए ताकि उद्योगों की निर्भरता खनिज तेल आदि से कम की जा सके। यही वजह है कि विश्वविद्यालय के ट्रस्टी समूह ने 22 मई को हुई बैठक में विचार विमर्श के बाद जलवायु परिवर्तन के खतरों को देखते हुए यह निर्णय लिया है, जो बिल्कुल सही और दूरदर्शी निर्णय माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रभावी रूप से यह अधिस्थगन जीवाश्म ईंधन पर केंद्रित नई और निजी इक्विटी और बांड वाहनों पर लागू होता है, जो एक श्रेणी है। यह कार्नेल के दीर्घकालिक निवेश का करीब 4.2 प्रतिशत है। समय के साथ यह घटकर शून्य प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की नई नीति अन्य सार्वजनिक जनादेशों पर लागू नहीं होती है।
इसमें जीवाश्म ईंधन की कंपनियां भी शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने जीवाश्म ईंधन पर जो यह निवेश करने का निर्णय लिया है, दरअसल वह भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लिया गया है। ताकि पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा को संवद्र्धन और संरक्षण किया जा सके। यह कदम नवीकरणीय संसाधनों के इस्तेमाल की ओर जाता है। विश्वविद्यालय के 70 प्रतिशत से ज्यादा निवेश पर्यावरण सामाजिक और शासन के मुद्दों को देख कर लिए गए हैं। निवेश करते समय इस बात को ध्यान में रखा जाता है कि यूएन द्वारा निर्धारित बातों का पालन हो। विश्व विद्यालय यह काम बहुत पहले से कर रहा हैं। जो पर्यावरण के लिए लाभदायक है।

2035 तक कार्बन न्यूट्रल परिसर बनाने का है संकल्प
विश्वविद्यालय के ट्रस्टियों की हुई बैठक के बाद मिरांडा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने के साथ ही अपनी उस प्रतिबद्धता को भी दोहराया है, जिसमें 2035 तक कार्बन न्यूट्रल परिसर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यहां बता दें कि कार्नेल विश्वविद्यालय को तमाम नए -नए शोध करने के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय के पास में कायुग झील के पानी को वह नवीकरणीय स्रोत की तरह इस्तेमाल करते हैं। जिससे जीवाश्म ऊर्जा का कम से कम इस्तेमाल किया जाए। संसार के संसाधनों के सही उपयोग की तरफ कॉर्नेल विश्वविद्यालय ने अपना कदम बढ़ा दिया है। विश्वविद्यालय के बोर्ड में जीवाश्म ईंधन पर रोक लगा नवीकरणीय एवं अन्य ऊर्जा के संसाधनों में पूंजी निवेश करने का निर्णय लिया है।

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