बड़ी फिल्मों की रिलीज के लिए बॉलीवुड करेगा इंतजार, ओटीटी प्लेटफार्म बस वैकिल्पक

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देश में कोरोना के चलते लॉकडाउन के बीच ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम पर सात नई फिल्मों की रिलीज के साथ ही ये माना जा रहा है कि छोटे और मीडियम बजट की फिल्में अब इन्हीं पर देखी जाने वाली हैं। हालांकि, 83 और सूर्यवंशी जैसी बड़े बजट की फिल्में बनाने वाल रिलायंस एंटरटेनमेंट ने अब यह साफ कर दी है कि वह अपने बड़े बजट की फिल्मों को ओटीटी प्लेट फार्म पर सिनेमाघरों में रिलीज करने के बाद ही उतारेगा। इसके लिए चाहे उन्हें कुछ दिन और इंतजार क्यों नहीं करना पड़ जाए। दरअसल फिल्म प्रोड्यूसर ने शिवाशीष ने भी दैनिक भाष्कर को दिए साक्षात्कार में माना है कि लॉकडाउन बढऩे के बाद भी फिल्म निर्माताओं के पास प्लान बी है, जो कि कुछ दिन और इंतजार की ओर इशारा कर रहा है।
शिवाशीष कहते हैं कि भारत में भी अन्य देशों की तरह अगस्त-सितंबर से सिनेमाघर खुलने के आसार है। वहीं ओवरसीज मार्केट भी जून-जुलाई से खुलने की संभावना है। ऐसे में फिल्मों का निर्माण सिनेमा के लिए भी होगा और ओटीटी के लिए भी किया जाएगा। वह कहते हैं कि सिनेमाघर और प्रोड््यूसर एक दूसरे के पूरक है और दोनों ही एक दूसरे की मदद के बिना नहीं चल सकते हैं। ऐसे में सारी फिल्में ओटीटी पर रिलीज नहीं की जा सकती हैं। लिहाजा प्रोड्यूसर्स के पास ऑप्शन बी यही है कि वे इंतजार करें। क्योंकि ऐसा नहीं है कि कोई मीडियम बंद हो जाएगा। हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता है, इस समस्या का भी समाधान निकल ही आएगा। 35 से 40 करोड़ के बजट वाली फिल्मों को 60 करोड़ देने की बातें सब हवा हवाई हैं, दरअसल ओटीटी प्लेटफार्म सिर्फ प्रॉफिट मार्जिन दे रहा है। हालांकि प्रमोशन का खर्च बच जा रहा है। प्रोड्यूसर को ओटीटी पर जाने में कोई दिक्कत नहीं है। उसे अपने स्टाफ को सैलरी देनी पड़ रही है इसलिए वह यकीनन ओटीटी पर जाएगा और यह एक तरह का बिजनेस मॉडल है।

सारे ओटीटी प्लेटफार्म मिलकर भी नहीं खरीद पाएंगे सभी फिल्में
दैनिक भाष्कार को दिए साक्षात्कार में शिवाशीष ने कहा कि सभी फिल्में खरीदने की बात में कोई दम नहीं है। साल में एक हजार फिल्में बनती हैं। हिंदी में ही करीब 200 फिल्में बनती हैं, जिन्हें खरीद पाना ओटीटी के लिए फिलहाल आसान नहीं हैं। तीसरी बात यह भी है कि अभी भी बॉक्स आफिस का 60 फीसद थियेटरों से ही आता है, जिसे किसी भी प्रोडयूसर के लिए छोडऩा आसान नहीं है। लिहाजा, तीन , छह या आठ महीने बाद जब भी सिनेमाघरों की हालत में सुधार आएगा सब उधर ही लौटेंगे।

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