उत्तराखंड का वह वेटर जो अब देवभूमि में पांच सौ करोड़ के निवेश का प्रस्ताव लाया है

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दीपक त्रिपाठी, देहरादून

  • सफलता के शिखर पर पहुंचने का सपना देखने वाले हर व्यक्ति को उत्तराखंड के इस सपूत की कहानी को पढ़कर प्रेरणा लेनी चाहिए। हाई स्कूल पास देव रतूड़ी ने, दूध बेचा, रेस्टोरेंट में वेटर बने और फिर चीन में रेस्टोरेंट की एक श्रंृखला खड़ी करके उद्योगपति बन गए जो भारत में अब पांच सौ करोड़ के निवेश का प्रस्ताव लेकर उत्तराखंड  आए हैं।

  • मुसीबत, सुविधाओं की कमी और कम पढ़े लिखे होने का रोना रोकर जो लोग किस्मत को कोसते हैं, ऐसे लोगों के लिए उत्तराखंड के टिहरी निवासी देव रतूड़ी एक नजीर हैं। वह एक ऐसी शख्सियत हैं, जो दुनियाभर में आज अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं, लेकिन एक समय ऐसा था, जब इनके पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे। यही नहीं नौवीं कक्षा तक की पढ़ाई के दौरान नंगे पैर स्कूल जाने वाला व्यक्ति आज चीन में आठ रेस्टोरेंट चला रहा है और सैकड़ों बेरोजगारों को रोजगार दे रहा है। दो दशक से भी कम समय में हाई स्कूल पास रतूड़ी ने जो सफलता हासिल की है, वह किसी भी व्यक्ति के लिए पे्ररणा का काम कर सकती है। यह सब बातें खुद देव रतूड़ी ने एक साक्षात्कार के दौरान बताई हैं।
    उत्तराखंड के जनपद टिहरी के सुदूरवर्ती गांव निवासी द्वारिका प्रसाद रतूड़ी ऊर्फ देव रतूड़ी आज चीन के बड़े उद्योगपतियों में से एक हैं। चीन में उनके आठ रेस्टोरेंंट चल रहे हैं, जिसमें वह भारतीय खाने के साथ ही यहां की संस्कृति को भी बढ़ावा दे रहे हैं। एक समय ऐसा था जब रतूड़ी चीन के एक रेस्टोरेंट में बतौर वेटर सात हजार रुपये पर नौकरी कर रहे थे, लेकिन उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने सफर पर निकले तो आसमान को छू लिया। यही नहीं देव रतूड़ी चाइनीज फिल्मों में बतौर एक्टर भी काम करते हैं। उनकी अब तक छह फिल्में रिलीज हो चुकी हैं। अब उनका सपना उत्तराखंड में व्यवसाय को स्थापित कर राज्य के लोगों को रोजगार देना है।

देव के संघर्ष की कहानी
देव के सपने काफी बड़े थे, लेकिन आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे उन्हें पूरा कर पाते, ऐसे में उनके सामने एक ही विकल्प था कड़ी मेहनत और लगन। इसे ही सूत्र बनाकर उन्होंने 1995 से शुरू हुआ। अपने बड़े भाई की तरह वह नौकरी करना तो चाहते थे, लेकिन उसे करियर न बनाकर सिर्फ एक सीढ़ी बनाना चाहते थे। यही सोचकर वह दिल्ली आ गए और यहां एक डेयर में 400 रुपये में नौकरी कर ली और घर-घर दूध पहुंचाने लगे। इसके बाद एक दिन अपने बड़े भाई के पास मुंबई चले गए। उनका भाई अभिनेता पुनीत इस्सर की कार का ड्राइवर था। उन्हें देखकर देव के अंदर भी हीरो बनने का सपना जाग गया, और उन्होंने एक दिन पुनीत इस्सर से फिल्म में कोई छोटा-मोटा रोल दिलाने का आग्रह किया, बार-बार के अनुरोध के बाद उन्होंने एक दिन स्क्रीन टेस्ट के लिए देव से कैमरे के सामने खड़ा होने को कहा। देव बताते हैं कि जैसे ही कैमरे के सामने पहुंचे उनके पैर कांपने लगे और उन्हें लगा कि यह काम उनके बस का नहीं है।

इस तरह से खोला पहला रेस्टोरेंट 

मुंबई में कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने ठान लिया कि एक दिन उन्हें एक्टर तो बनना ही, लेकिन इसके लिए उनके अंदर कोई ऐसा टैलेंट नहीं था। जिसके दम पर उन्हें फिल्म मिल सके। इसके बाद उन्होंने चाइना जाने की सोची और चाइना निकल गए। यहां उन्होंने एक रेस्टोरेंट में वेटर की नौकरी शुरू कर दी। यहां से उनके करियर ने रफ्तार पकड़ी और कुछ ही सालों में वेटर की नौकरी करने वाला हाईस्कूल पास यह लड़का एक रेस्टोरेंट का मैनेजर बन गया। लेकिन देव का सपना तो इससे भी कहीं बड़ा था। इसे पूरा करने के लिए वर्ष 2010 में देव ने अपना खुद का रेस्टोरेंट खोलने की कोशिश शुरू कर दी। इसमें उनकी मदद देव के पुराने मालिक ने कुछ कर्ज देकर की, जिससे कि 2013 में वह खुद का रेस्टोरेंट बनाने में सफल हो सके।

सफलता के आसमान में फिर देव ने इस तरह भरी उड़ान
2013 में पहला रेस्टोरेंट खोलने के बाद देव के करियर ने रफ्तार पकड़ लिया। दरअसल देव ने इस रेस्टोरेंट का नाम तो रेड फोर्ट रखा, लेकिन यहां चाइना के लोगों को भारतीय संस्कृति और स्वाद से भी रूबरू कराने का निर्णय लिया। इसमें भारतीय संस्कृति को समेटे हुए कई पेंटिंग्स के अलावा भारतीय भोजन भी दिया जाता था। यही नहीं इसमें चीन के लोगों को योग भी सिखाया जाता है। जो कि चाइना के लोगों ने काफी पसंद किया और कुछ ही समय में रेड फोर्ट के चाहने वालों की चीन में लंबी फेहरिस्त हो गई। इसके बाद एक-एक कर उन्होंने चीन में रेड फोर्ट नाम से आठ रेस्टोरेंट खोल दिए हैं। आज वह चीन की बड़ी शख्सियत हैं, वहां के कई टीवी चैनल, वेबसाइट और न्यूज चैनल उनका इंटरव्यू ले चुके हैं। हाल ही में वह उत्तराखंड में पांच सौ करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव लेकर आए हैं। बॉलीवुड की फिल्मों में भले ही हीरो नहीं बन सके, लेकिन चीन में कई फिल्मों में अभिनय किया देव बताते हैं कि दौलत पाने के साथ ही शोहरत का शिखर भी छू लिया, लेकिन हीरो बनने का जो सपना बचपन में देखा था, वह आज भी उनकी आंखों में आकार ले रहा था। इसलिए एक बार फिर उन्होंने इस क्षेत्र में हाथ आजमाने का निर्णय लिया और इस बार पूरी तैयारी के साथ चाइनीज फिल्मों के लिए कैमरे के सामने उतरे। कहते हैं न कि अगर किसी चीज को दिल से चाहों तो कायनात भी उसे पाने में आपकी मदद करती है। ऐसा ही देव के साथ हुआ और चाइनीज फिल्मों में उनका सिक्का चल निकला और कुछ ही सालों में देव चीन की कई फिल्मों में काम करने के बाद एक सफल हीरो के रूप में स्थापित हो गए। स्टीट बर्थ उनकी प्रमुख फिल्मों में से एक हैं। बेहद चुस्त दुरुस्त दिखने वाले देव कुंग फु भी सीख रहे हैं।

आसमान तो छुआ लेकिन जमीन को नहीं छोड़ा
देव रतूड़ी की शख्सियत एक मायने में और भी बेहद खास है, दरअसल सफलता के आसमान पर पहुंचने के बाद भी देव ने कभी भारतीय जड़ों से खुद को दूर नहीं किया। देवभूमि के संस्कार और बड़ों का सम्मान तो उनका गहना है ही। इसके अलावा चीन में खुद को स्थापित करने के बावजूद उन्होंने उत्तराखंड देवभूमि से ही अपने लिए जीवन साथी चुना। उनकी पत्नीअंजलि ऋषिकेश की रहने वाली हैं। देव के दो प्यारे बच्चे हैं, आरव और अर्णब, जिन्हें देव अभिनेता बनाना चाहते हैं। दोनों ही बच्चों को अभी से देवभूमि के संस्कार भी दे रहे हैं। फर्श से अर्श तक पहुंचने की देव की कहानी भले ही फिल्मी या किस्मत का खेल लग रही हो लेकिन हकीकत यही है कि देव ने न सिर्फ सपने देखे बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत भी की, जिसके दम पर आज वह एक सफल उद्योगपति के साथ ही बेहतर एक्टर और अच्छे इंसान के रूप में उत्तराखंड का मस्तक ऊंचा कर रहे हैं।

 

 

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