Citizenship Amendment Act: सियासत के लिए राजधानी को कश्मीर बनाने की साजिश

Must Read

करेला मन पट जाए गाने पर Amrapali लगा रहीं nirahua के साथ पर्दे पर आग, देखें वीडियो

भोजपुरी फिल्म अभिनेता दिनेश लाल निरहुआ और आम्रपाली दुबे (Amrapali dubey)के बीच पर्दे पर जुगलबंदी शानदार रहती है। उनकी...

सपना चौधरी के मूव्स का मच गया हल्ला, वीडियो हुआ वायरल

सपना चौधरी की नई वायरल वीडियो में वह अपने मूव्स को दिखाती नजर आई। लॉक डाउन के दौरान या...

कोरोना ने बदल दिया फिल्मों का रूप, अब इस तरह बनेंगी फिल्में और लागू होंगे ये नियम

कोरोना काल ने जहां सबकुछ बदल दिया है, वहीं फिल्मों की शूटिंग से लेकर अदाकारी का अंदाज भी बदलने...
- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -

प्रदीप तिवारी

नई दिल्ली । विरोध के नाम पर राजधानी को सुलगाने की साजिश लगातार हो रही है। जेएनयू, जामिया और अब सीलमपुर आखिर प्रदर्शनकारी इतने उग्र क्यों हो जा रहे हैं  कि पुलिस के साथ धक्कामुक्की, पथराव और फिर आगजनी व तोडफ़ोड़ पर उतर आ रहे हैं। दरअसल यह पूरी तरह से राजधानी को कश्मीर बनाने की साजिश रची जा रही है। सियासी दल नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर राजधानी में अराजकता और उपद्रव को लगातार हवा दे रहे हैं, ताकि हिंदू बनाम मुस्लिम के बीच भाईचारे का जो रिश्ता वर्षों बाद मजबूत हुआ है, उसे एक बार फिर सुलगाया जा सके और इसकी आंच पर अपनी सियासी रोटियां सेंकी जा सके। सबसे पहले बात जेएनयू की करते हैं, यहां पर छात्रों ने हास्टल फीस में वृद्धि का विरोध करते हुए पुलिस के साथ मारपीट, तोडफ़ोड़ और हंगामा किया। इसके बाद यह बातें सामने आई कि पुलिस के साथ मारपीट करने वालों में ज्यादातर बाहरी लोग शामिल थे। इसके बाद हैदराबाद मामले को लेकर राजधानी को सुलगाने का प्रयास किया गया ।

यही नहीं अनु दुबे के रूप में एक युवती खुद को इस कांड से दुखी बताते हुए संसद भवन तक जा पहुंची और पुलिस पर मनमाने आरोप लगाते हुए। भावनाओं के नाम पर देश में हंगामा खड़ा करने की कोशिश की गई। आखिर यह अन्नु दुबे कहां से आई और कौन है यह आज तक पता नहीं चल सका। मीडिया रिपोर्ट़र्स और पुलिस सूत्रों से जो जानकारी मिली उसके मुताबिक यह सब एक राजनीतिक दल के इशारे पर सोची समझी रणनीति के तहत किया गया था। ताकि केंद्र सरकार केा महिला विरोधी घोषित किया जा सके। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक आम युवती हैदराबाद की घटना से इतनी डरी और दुखी कैसे हो गई कि उसे संसद में  प्रदर्शन करने की सूझ गई। चलो यह भी मान लिया जाए कि जागरूक समाज में ऐसे लोग होना कोई बड़ी बात नहीं, तो उसे यह किसने सलाह दी कि इसके लिए सबसे बेहतर जगह संसद भवन है। उससे भी बड़ा सवाल यह है कि उसे पहले से यह पता था कि संसद भवन पर जाने पर क्या होने वाला है। इसलिए वह प्रदर्शन करने जाने से पहले अपने साथ मीडिया की फौज लेकर गई। इसके बाद जैसे ही कैमरा ऑन हुआ उसने स्क्रिप्ट के मुताबिक पूरा ड्रामा रचा और और नाम दिया गया महिला सुरक्षा को दुखी देश की बेटी, आखिर देश की यह बेटियां पिछले पांच सालों से दिल्ली में क्यों नहीं जागी जब आए दिन महिलाओं के साथ दुष्कर्म, हत्या और घर से निकाले जाने की घटनाएं हो रही थीं। तीन तलाक को लेकर मािहलाओं को हलाला के लिए मजबूर किया जाता रहा।


अब बात अगर हम जामिया मामले की करें तो यह दिल्ली की ऐसी मुस्लिम यूनीवर्सिटी है, जहां के छात्र राजनीति से दूर रहकर पढ़ाई के लिए जाने जाते हैं। देश में होने वाले तमाम तरह के विवादों से यह दूर ही रहते हैं। लेकिन हमारे सियासी दलों ने इन्हें भी राजनीति का शिकार बना दिया। पहले इन्हें प्रदर्शन के लिए उकसाया गया और फिर छात्रों की आड़ में अपने युवा कार्यकर्ताओं को आगजनी पथराव के लिए इनके बीच उतार दिया गया। खुद जामिया के कुलपति ने यह बात कही है कि हिंसा करने वाले उनके कालेज के छात्र नहीं बल्कि बाहरी लोग थे। आखिर यह बाहरी लोग कौन थे, यह जांच का विषय है। पुलिस इस गुत्थी को सुलझाती उससे पहले ही मंगलवार को दिल्ली के सीलमपुर इलाके में पथराव और हिंसा शुरू कर दी गई। राजधानी के इस इलाके में एक वर्ग विशेष के लोग ज्यादा रहते हैं। सबसे बड़ी बात यहां पर यह है कि कश्मीर की तरह यहां भी पुलिस पर पत्थर फेंके गए, अवैध असलाहों से फायरिंग की गई। जाहिर है कहीं न कहीं राजधानी में कश्मीर जैसे हालात पैदा किए जाने की कोशिश की जा रही है। सबसे बड़ी कोशिश इस विरोध को हिंदू बनाम मुस्लिम बनाने की हो रही है, ताकि दोनेां समुदाय आमने सामने आ जाएं और सियासी आग जल उठे। लेकिन सवाल फिर वहीं पर है कि आखिर चंद लोगों के बहकावे में आकर आवाम इस तरह कैसे कर सकती है। दूसरी तरफ देश की सियासत क्या इतना ज्यादा पतन की ओर बढ़  चली है कि मासूमों के खून से सत्ता की स्याही बनाई जा रही है। अभी वक्त है दोस्तों संभल जाइए, नहीं तो सत्ता के भूखे यह सियासी लोग आपके भाई, बहनों और बच्चों की बलि देने में भी नहीं चूकेंगे। देश की जनता और खासकर उन लोगों को यह सोचना चाहिए कि आखिर यह हिंसा और विरोध किसके लिए यह लोग कर रहे हैं। किसके लिए उन लोगों पर पत्थर फेंके जा रहे हैं, जिनके कंधों पर हमारी सुरक्षा का जिम्मा है। पड़ोसी देश के उन मुस्लिमों के लिए क्या अपने ही भाइयों का खून बहाना उचित है, जिनके साथ हम पले, बढ़े और पूरा जीवन व्यतीत करना है।

लेखक के यह निजी विचार हैं

- Advertisement -
- Advertisement -

Latest News

करेला मन पट जाए गाने पर Amrapali लगा रहीं nirahua के साथ पर्दे पर आग, देखें वीडियो

भोजपुरी फिल्म अभिनेता दिनेश लाल निरहुआ और आम्रपाली दुबे (Amrapali dubey)के बीच पर्दे पर जुगलबंदी शानदार रहती है। उनकी...

सपना चौधरी के मूव्स का मच गया हल्ला, वीडियो हुआ वायरल

सपना चौधरी की नई वायरल वीडियो में वह अपने मूव्स को दिखाती नजर आई। लॉक डाउन के दौरान या बाद वीडियो फैंस के बीच...

कोरोना ने बदल दिया फिल्मों का रूप, अब इस तरह बनेंगी फिल्में और लागू होंगे ये नियम

कोरोना काल ने जहां सबकुछ बदल दिया है, वहीं फिल्मों की शूटिंग से लेकर अदाकारी का अंदाज भी बदलने जा रहा है। यही नहीं...

Raktaanchal M: अभिनेता प्रकाश झा ने कहा विजय सिंह जैसा किरदार कभी नहीं निभाया

web series:एमएक्स प्लेयर ने अपनी आने वाली वेब सीरीज रक्तांचल जिसे रितम श्रीवास्तव ने निर्देशित किया है, का ट्रेलर जारी कर दिया है। जिसमें...

भीषण गर्मी से आपको बचाएगा विभिन्न मिश्रणों से बना तुलसी का यह काढ़ा

धार्मिक ग्रंथों में जहां एक ओर तुलसी को भगवान का दर्जा दिया गया हैतो वहीं  दूसरी ओर इसमें मौजूद चमत्कारी औषधीय गुण तुलसी की...
- Advertisement -