भाईचारे के लिए साथ काम कर सकते हैं संघ व जमीयत

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नई दिल्ली : बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम में मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हंिदू के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की। यह मुलाकात शुक्रवार को नई दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ कार्यालय केशव कुंज में हुई। डेढ़ घंटे चली बैठक के बारे में संघ अभी कुछ बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन जमीयत की ओर से बताया गया कि मुलाकात में देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए साथ आकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया।
इस तरह की बैठक की पटकथा दो साल से लिखी जा रही थी। आपसी भाईचारा को बढ़ावा देने में जुटा राष्ट्रीय जनमंच इसके लिए प्रयासरत था। अब आगे संघ और जमीयत में नियमित संवाद के लिए समन्वय की जिम्मेदारी अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख रामलाल को दी गई है, जो बैठक में भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि मुलाकात के दौरान मदनी ने कहा कि देश में भय का माहौल गर्माता जा रहा है। भीड़ ¨हसा और तीन तलाक को लेकर अल्पसंख्यक वर्ग में चिंता का माहौल है। एक बड़े समुदाय में भय पैदा कर देश का विकास नहीं हो सकता है। इसे दूर करने की जरूरत है। इस पर मोहन भागवत ने कहा कि संघ शुरू से मानता रहा है कि उसके हंिदूुत्व का मतलब हंिदूू, मुस्लिम सभी धर्मो से है। वह शांति और आपसी भाईचारे का हिमायती है, जिस पर मदनी ने बंद कमरों से बाहर निकलकर दोनों को मिलकर काम करने का आग्रह किया है। करीब दो साल पहले भी भागवत ने दिल्ली में वरिष्ठ मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की थी। पिछले वर्ष विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय ‘भविष्य का भारत’ व्याख्यानमाला में भागवत ने लोगों से खासकर मुस्लिम समुदाय से संघ को समझने के लिए करीब आने का आग्रह किया था। इस शीर्ष मुलाकात के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। यह इसलिए भी, क्योंकि नवंबर में सुप्रीम कोर्ट से राममंदिर निर्माण पर फैसला आने का अनुमान है। वहीं, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35 ए हटाने को लेकर देश के बाहर-भीतर सियासत गर्माई हुई है।

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