गरीबी के सौदागर ही दिल्ली में बन गए अग्निकांड मृतकों के रिश्तेदार

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नई दिल्ली । आर्थिक दहाली से जूझ रहे बिहार के लोगों के मजबूरी का दिल्ली के फैक्ट्री मालिक से सौदा करने वाले उनके शवों के भी ठेकेदार बन गए। किसी ने मामा तो किसी ने नकली चाचा बनकर प्रशासन से ले लिए शव। परिजन जब दिल्ली पहुंचे तो हुआ इसका पर्दाफाश। इसके साथ ही यह भी पता चला है कि ठेेकेदारी प्रथा के चलते ही एक ही जिले के ज्यादातर लोगों को यहां लाया गया था, जो कि आपस में रिश्तेदार भी बताए जा रहे हैं।
दरअसल, ठेकेदारों और फैक्ट्री मालिकों की मिलीभगत से मजदूरों को यहां लाकर एक ही कमरे में रखा गया था। उन्हें व उनके परिवार के लोगों को रोजगार के साथ ही बेहतर सुविधाएं देने का वादा करके यह लोग उन्हें बिहार से लेकर आए थे। जिन्हें फैक्ट्री मालिक के हवाले कर महज सात से दस हजार रुपये में दस से 12 घंटे तक काम लिया जा रहा था। यही नहीं जब हादसा हुआ तो यही ठेकेदार इन मजदूरों के रिश्तेदार यानी मामा, चाचा या मौसेरे भाई बनकर प्रशासन के सामने आ गए और हितैषी बनकर शवों को ले जाने लगे। यह खुलासा खुद समस्तीपुर से पहुंचे दो लोगों ने किया है।
फिल्मिस्तान क्षेत्र स्थित अनाज मंडी में रविवार को अवैध फैक्ट्री में हुए अग्निकांड में 43 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें कई नाबालिग भी शामिल हैं। मृतकों में सबसे अधिक लोग बिहार के रहने वाले हैं। इनमें भी सबसे अधिक संख्या समस्तीपुर के लोगों की है। इसके बाद सहरसा और सीतामढ़ी के लोग अधिक संख्या में मृतकों में शामिल हैं। समस्तीपुर निवासी हुसैन और राशिद ने बताया कि इन युवाओं को काम दिलाने के नाम पर बिहार से दिल्ली लाकर ऐसी जगह में कैद कर दिया गया, जहां से निकलने का रास्ता न दिन में मिलता था और न रात में मिलता था। दिन में काम करते और रात में वहीं सो जाते। उन्होंने बताया कि समस्तीपुर, सहरसा और सीतामढ़ी से इन युवाओं को दिल्ली लाने वाले एक नहीं कई ठेकेदार हैं। ये ठेकेदार इन्हें फैक्ट्री में काम पर रखवा देते और स्वयं दिल्ली में रहते तक नहीं थे। इनमें से कई गुरुग्राम में रह रहे हैं, जो हादसे की सूचना के बाद दौड़ते हुए अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में आने वाले मृतकों और घायलों के परिजन को सांत्वना देने के अलावा ये लोग वहां हमदर्दी बटोरने के लिए स्वयं को मृतकों के चाचा और मामा तक बताने लगे। जबकि, जिस गांव के रहने वाले लोग मारे गए हैं, ये ठेकेदार उस गांव के नहीं, बल्कि उसके आसपास के रहने वाले हैं। कई मृतक युवकों के परिजन अस्पताल में पहुंचे तो एक बार में शवों की पहचान नहीं कर सके, लेकिन इन ठेकेदारों ने एक नजर में एक-एक करके सभी मृतकों की शिनाख्त कर डाली। परिजन को पहचान में संशय था, लेकिन ठेकेदारों ने पहचान के चिह्न् , कद-काठी के आधार पर शवों की पहचान कर ली। इन ठेकेदारों ने परिजन की मौजूदगी में घडियाली आंसू भी बहाए।

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