हेयर कलर और हर्बल मेहंदी से खराब हो रही है त्वचा

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नई दिल्ली । फेयरनेस क्रीम से त्वचा की एलर्जी होने की बात पहले भी सामने आती रही है। अब हेयर कलर व हर्बल मेहंदी से त्वचा रोग होने की बात सामने आई है। ऐसे में यदि आप यह सोचकर बाल रंगने में हर्बल मेहंदी का इस्तेमाल कर रहे हैं कि यह रसायन मुक्त है तो सचेत हो जाएं। एम्स के अध्ययन में यह बात सामने आई कि हर्बल मेहंदी में भी ऐसे रासायन इस्तेमाल हो रहे हैं जिनसे एलर्जी से पीड़ित होकर लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। साथ ही विदेश में हुए एक अंतरराष्ट्रीय शोध में भी बात समाने आ चुकी है कि हेयर डाई व हर्बल मेहंदी में रसायनों की मिलावट हो रही है। लिहाजा एम्स ने एक दूसरा शोध भी शुरू किया है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि देश में तैयार हेयर कलर में किस तरह के रसायन मिलाए जा रहे हैं। एम्स के त्चचा रोग विभाग के प्रमुख डॉ. वीके शर्मा ने कहा कि यूरोप में जो शोध हुआ था, उस दौरान शोधकर्ताओं ने भारत में बनने वाले हेयर कलर के सैंपल भी लिए थे, जिसमें हर्बल मेहंदी के उत्पाद शामिल थे। उस शोध में पाया गया था कि हेयर डाई में पांच तरह के रसायन का इस्तेमाल हो रहा है। हर्बल मेहंदी में भी रसायन युक्त डाई का इस्तेमाल हो रहा है। जिसमें पीपीडी सबसे प्रमुख है। आइआइटी रुड़की के साथ मिलकर मिलावट पर शोध : डॉ. वीके शर्मा ने कहा कि हर्बल मेहंदी के पैकेट पर यह बात लिखी नहीं होती है कि उसमें क्या मिलाया गया है। इसलिए एम्स ऋषिकेश व आइआइटी रुड़की के साथ मिलकर यहां भी शोध किया जा रहा है। इसके लिए दिल्ली और इसके आसपास के शहरों में बिकने वाले 50 हेयर डाई उत्पादों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें रसायनिक हेयर डाइ के साथ-साथ हर्बल भी शामिल हैं और उसकी जांच की जा रही है। अगले कुछ महीनों में यह शोध पूरा हो जाएगा। प्रिजर्वेटिव से त्वचा रोग ज्यादा : डॉ. रीति भाटिया ने कहा कि जनवरी 2015 से अक्टूबर 2017 तक एलर्जी से पीड़ित 106 मरीजों पर शोध किया गया। इनमें 77 महिलाएं व 29 पुरुष थे। इनमें से ज्यादातर लोग 30 से 44 वर्ष की उम्र के थे। शोध में पाया गया कि 74 मरीजों के चेहरे की त्वचा पर कालापन आ गया था। शेष मरीजों को दूसरे तरह की एलर्जी थी। मरीजों में एलर्जी का कारण जानने के लिए पैच टेस्ट किया गया। इस टेस्ट से यह पता लगाया जाता है कि किस तरह के पदार्थ या रसायन के दुष्प्रभाव से एलर्जी हुई है। इस दौरान 77 मरीजों में पैच टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इनमें 50 फीसद मरीजों में एलर्जी का कारण प्रिजर्वेटिव पाया गया। फेयरनेस क्रीम व कॉस्मेटिक को संरक्षित रखने में इसका इस्तेमाल होता है। इसके अलावा 31 फीसद मरीजों को एलर्जी ऐसे रसायन से हुई था, जिसका इस्तेमाल हेयर डाई में होता है। इसमें पीपीडी से एलर्जी अधिक पाई गई। इस्तेमाल करें पर संभल कर : डॉ. वी के शर्मा ने कहा कि 35 फीसद मरीज बालों को रंगने के अलावा फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल भी करते थे। हेयर डाई व क्रीम से एलर्जी होने पर त्वचा का रंग बदलने लगता है। त्वचा लाल या काली होने लगती है। खुजली व जलन जैसा महसूस हो सकता है। कई लोगों को एग्जिमा भी हो सकता है। इसलिए इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि त्वचा पर कोई एलर्जी हो रही है या नहीं। दुष्प्रभाव महसूस होने पर इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। ¨बदी व सिंदूर से भी त्वचा रोग : डॉक्टर कहते हैं कि ज्यादातर महिलाएं व लड़कियां श्रृंगार के लिए ¨बदी का इस्तेमाल करती हैं। इस ¨बदी व सिंदूर से भी एलर्जी के कारण त्वचा रोग के मामले देखे जाते हैं। लिक्विड ¨बदी से त्वचा सफेद हो जाती है। सिंदूर का कारोबार असंगठित क्षेत्र द्वारा किया जाता है। इसमें मिलावट की निगरानी की व्यवस्था नहीं है, जबकि लाल व पीले रंग के सिंदूर बनाने में अलग-अलग तरह के रसायनों का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए सिंदूर निर्माण को निगरानी के दायरे में लाना होगा। साथ ही ¨बदी के इस्तेमाल के प्रति महिलाओं को सजग रहना चाहिए।

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