सरकार रिजर्व बैंक के अधिशेष भंडार का बड़ा हिस्सा हड़पने की योजना में सफल हो चुकी

0
67

नई दिल्ली । विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 71.57 रुपए प्रति डॉलर पर आ गया है। कमजोर वैश्विक रुख के बीच बैंकिंग एवं धातु कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट आई है। आज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने पूंजी बाजार से 923.94 करोड़ रुपए की निकासी की।
…सरकार रिजर्व बैंक के अधिशेष भंडार का बड़ा हिस्सा हड़पने की योजना में सफल हो चुकी है। इस भंडार को बाजार के भारी संकट के लिए रखा जाता है। बैंकों की कंगाल स्थिति पर केंद्रीय बैंक इस धन का कुछ हिस्सा बैंकों को देता है। बैंकों के माध्यम से यह पैसा बाजार में तरलता लाता है। भारत के इतिहास में यह पहली घटना है जब सरकार ने रिजर्व बैंक से 1.76 लाख करोड़ रुपए खुद को ट्रांसफर करा लिए। इस धन का बाजार में कोई उपयोग नहीं होना है। धन लेने से पहले कोई कार्ययोजना भी पेश नहीं की गई।
…जानकारों के मुताबिक रिजर्व बैंक के पास करीब नौ हजार अरब रुपए अधिशेष भंडार होने का अनुमान है। यह मुख्य पूंजी का करीब 27 प्रतिशत है। बाजार के भारी संकट के बीच सरकार का यह फैसला जल्द बैंकों को भी डुबा देगा। लगातार बंद हो रहे उद्योगों से बैंक का ऋण वापस आने की उम्मीद खत्म हो चुकी है। बड़े नोट पहले ही बाजार और बैंकों से गायब हो चुके हैं।
…सरकार देश की संजोयी संपति को अपने भोग विलास में उड़ाने की तिकड़म में सफल हो गई है। यदि दुनिया में कहीं भी एक सरकार अपने केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट को हड़पना चाहती है तो समझो कि सरकार का खजाना खाली हो चुका है। केंद्रीय बैंक के अधिशेष भंडार को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक के बीच चली खींचतान के कारण ही पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दिया था।
…इन हालातों के बीच रुपया लगातार कमजोर होगा, विदेशी निवेशक हाथ खींचेंगे और उद्योग-धंधे तेजी से बंद होंगे, बेरोजगारी भयावह तरीके से बढ़ेगी। 

और पढ़ें:   भाजपा की दिल्ली में पूर्वांचल के मतदाताओं पर दांव लगाने की तैयारी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here