भाजपा-शिवसेना में सत्ता की जंग के बीच राष्टपति शासन की ओर बढ़ा महाराष्ट्र,

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साभार न्यूज 18

नई दिल्ली : महाराष्ट्र में सत्ता की जंग अब सियासी अंजाम की ओर बढऩे लगी है, दरअसल शिवसेना और भाजपा दोनों ही मुख्यमंत्री पद को लेकर झुकने को तैयार नहीं हैं।
दरअसल राकांपा प्रमुख शरद पवार ने सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद अपनी तरफ से सूबे के सियासी सस्पेंस का पर्दा नहीं उठाया। पवार ने राकांपा-कांग्रेस को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिलने की बात तो कही मगर शिवसेना-भाजपा के झगड़े में सरकार नहीं बनने पर भविष्य का विकल्प बंद नहीं करने का भी संकेत दे दिया। साथ ही मराठा दिग्गज ने भाजपा-शिवसेना को सूबे में जल्द सरकार बनाने की नसीहत भी दी। भाजपा और शिवसेना के बीच चल रही जंग में भविष्य की संभावनाओं पर विचार करने से परहेज नहीं करने का संकेत देते हुए शरद पवार ने साफ कहा कि सोनिया गांधी से दोबारा इसको लेकर उनकी मुलाकात होगी। भाजपा को आंख दिखा रही शिवसेना के रुख को देखते हुए शरद पवार की सोनिया गांधी से सोमवार को हुई मुलाकात सियासी रूप से बेहद अहम रही। शिवसेना को समर्थन देने या नहीं देने के मसले पर पवार ने कांग्रेस नेतृत्व का मन भांपने का प्रयास किया। इस बातचीत में फिलहाल दोनों के बीच यह रणनीतिक सहमति साफ दिख रही कि कांग्रेस-राकांपा सीधे शिवसेना का समर्थन करते दिखाई देने से परहेज करें। साथ ही भाजपा के खिलाफ शिवसेना की आक्रामक सियासत ठंडी भी न पड़े इसके मद्देनजर भविष्य का विकल्प खुला रखने का संकेत दिया जाए। सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद शरद पवार ने पत्रकारों को इसका साफ संकेत भी दिया। शिवसेना की ओर से सरकार बनाने का प्रस्ताव मिलने की बातों से इन्कार करते हुए पवार ने कहा कि इसको लेकर हमारी शिवसेना से कोई बात नहीं हुई है। न राकांपा ने शिवसेना से संपर्क किया है और न ही शिवसेना की ओर से हमें कोई प्रस्ताव आया है। पवार ने कहा कि मौजूदा सियासी हालात से उन्होंने सोनिया को रूबरू कराया है। जमीनी सच्चाई यह है कि महाराष्ट्र की जनता भाजपा के खिलाफ है। मगर सरकार बनाने का नंबर हमारे पास नहीं है। हम जिस पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़े उस पार्टी के साथ जाना संभव नहीं है। हमें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है। मगर राज्य में जो हालात हैं उसमें मैं यह भी नहीं कह सकता कि आगे क्या होगा। पवार की यह टिप्पणी भविष्य का विकल्प खुला होने की ओर इशारा कर रही है। शिवसेना के रुख से जुड़े सवाल पर पवार ने कहा कि भाजपा-शिवसेना को जल्द सरकार बना लेनी चाहिए। मगर हम देख रहे हैं कि भाजपा को लेकर शिवसेना का रुख काफी आक्रामक है। राकांपा प्रमुख ने उनके दोबारा मुख्यमंत्री बनने की अटकलों को खुद ही खारिज कर दिया। सियासी झगड़े की वजह सूबे में क्या राष्ट्रपति शासन ही विकल्प रह गया है? इस पर पवार ने कहा कि सरकार बनाना शिवसेना और भाजपा की जिम्मेदारी बनती है। लेकिन एक ओर महाराष्ट्र के लोग तमाम समस्याओं से जूझ रहे और दूसरी तरफ ये दोनों पार्टियां अपनी जिम्मेदारी से भाग रही हैं।

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