Coronavirus से लड़ाई में क्या करना होगा और कितना बड़ा है खतरा

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दीपू चतुर्वेदी

देश मेें कोरोना की जो स्थिति है, वह अभी उतनी गंभीर नहीं है, जितनी कि इटली, अमेरिका, दक्षिण कोरिया या फिर चीन में है। लेकिन, यह मान लेने की जरूरत नहीं है कि हम इन देशों की तरह खतरे की जद में नहीं हैं क्योंकि अभी भारत में जो टेस्ट किए गए हैं, वह बहुत ही कम हैं। ऐसे में हमें और अधिक टेस्ट करने के साथ ही इस महामारी से लडऩे के लिए और अधिक व्यवस्थाएं करने की आवश्यकता है। क्योंकि इन देशों में जो महामारी की स्थिति है, वैसी स्थिति यदि भारत में पैदा होती है, तो समझ लीजिए की यह खतरा इतना बड़ा हो जाएगा कि देश को इसे संभालना मुश्किल हो जाएगा। इन देशों में महामारी से लडऩे के लिए किस स्तर पर व्यवस्था की गई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फ्रांस में जो परफ्यूम और इत्र बनाने की सबसे बड़ी कंपनी थी। उसने एक ही झटके में
सैनिटाइजर बनाने की कंपनी में खुद को कन्वर्ट कर लिया। यही नहीं जो मेडिकल का सामान बनाने की कंपनियां थी उन्होंने मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया ताकि इन चीजों की आम आदमी तक पहुंच बनी रहे और संकट न होने पाए। कमोबेश ऐसा ही अन्य देशों में हुआ है। लेकिन भारत में अभी भी लोग मुनाफाखोरी और जमाखोरी पर ध्यान देर रहे हैं, शायद यह लोग उस खतरे को समझ नहीं पा रहे हैं, जो हमारे सामने खड़ा है। या फिर यह लोग समझना नहीं चाहते हैं।
यहां बता दें कि भारत में आइसीयू में मरीजों को भर्ती करने के लिए सरकारी अस्पतालों में कुल एक लाख बेड की आवश्यकता है, जबकि हर साल 50 लाख लोगों को आइसीयू में भर्ती करने की जरूरत होती है। वहीं भारत में 16 करोड़ लोगों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अब हमें इस बीमारी से लडऩे के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। यह ऐसा समय है, जिसमें जाति, धर्म पार्टी और घाटा मुनाफा सब कुछ भूलकर सिर्फ देशहित और जनहित में लोगों को काम करना होगा। वहीं देश के सक्षम लोगों को भी गरीब तबके तक सुरक्षा के साधन पहुंचाने के लिए आगे आने की जरूरत है। जिस तरह से विदेशों में लोगों ने अपने खजाने का मुंह आम जनता की मदद के लिए खोला है, उसी तरह भारत के भी समाजसेवियों और बड़े घराने के लोगों को गरीब, मजदूर और झोपडिय़ों तक राशन, दवा, मास्क और सैनिटाइजर पहुंचाने की जरूरत है। भारत सरकार को भी राज्यों के साथ मिलकर एक नई शुरुआत करनी होगी। खासतौर पर बस्तियों की निगरानी करने के साथ ही शहरों में जो अपार्टमेंटस हैं उनकी निकरानी की खास योजना बनाए जाने का अब समय आ गया है। जनता कफ्र्यू के साथ ही सरकारों के इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि जो लोग दो जून की रोटी कमाने के लिए रोज घर से निकलते हैं, उन तक निवाला कैसे पहुंचाया जाए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए भी है,ं जिनकी सराहना की जानी चाहिए। अन्य राज्यों को भी इसी तरह गरीबों तक राशन, मास्क और सैनिटाइजर पहुंचाने का प्रयास करना होगा। इसके लिए सरकारों को एक टास्क फोर्स का गठन करना होगा, जो कि यह सुनिश्चित करें कि हर आदमी तक ये जरूरी सामान पहुंच पा रहा है। या फिर नहीं पहुंच पा रहा है। अब इसके लिए जरूरत कितनी होगी यह समझ लेते हैं।

आम जनता तक कैसे पहुंचाएं सुविधाएं
भारत करीब 32 लाख 87 हजार 265 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। ऐसे में एक किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक टास्क फोर्स तैनात की जानी चाहिए। जिसमें एक राशन देखेगा एक हैंड सैनिटाइजर देखेगा एक मास्क देखेगा एक हॉस्पिटल देखेगा। ऐसे में करीब एक करोड़ 63 लाख कर्मचारियों की जरूतर होगी जबकि देशभर में करीब दो करोड़ 15 लाख 47 हजार 845 कर्मचारी हैं। ऐसे में यह कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि अभी हम इस स्तर पर कितना सोच रहे हैं। यदि स्थितियां इटली और कोरिया जैसी आती हैं, तो गरीबों तक राशन पहुंचाना एक बड़ी समस्या हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार को चाहिए कि राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस पर ठोस रणनीति बनाएं। अगर जरूरत पड़े तो गली मोहल्लों में जो राशन की दुकानें हैं, उनका सामान खरीदकर गरीबों वितरित कराने की भी व्यवस्था की जा सकती है। क्योंकि खतरा हमसे अब बहुत ज्यादा दूर नहीं है। इटली से जहां हम महज एक महीना दूर हैं, वहीं अमेरिका से सिर्फ दिन दूर हैं। यानी इटली में एक माह पहले और अमेरिका में 15 दिन पहले यही परिस्थितियां थीं, जो भारत में आज हैं। ऐसे में अभी से संभलना बेहद जरूरी है। भारत के मौजूदा हालात को जान लेने के लिए यह जानना जरूरी है कि भारत में फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया में 23221 लोग काम करते हैं। वहीं देशभर में मौजूदा समय में कुल 5 लाख 27 हजार राशन की दुकानें काम कर रही हैं। इसमें दिल्ली में 2254 हैं, उत्तर प्रदेश में 80772 हैं, बिहार मे7483 है, महाराष्ट्र में 52505 है, मध्य प्रदेश में 22469 हैं।

सैनिटाइजर की स्थिति
देश में जो मौजूदा हालात हैं, कोरोना अगर इससे आगे बढ़ता है तो देश में सबसे बड़ा संकट सैनिटाइजर का होने वाला है। क्योंकि, वायरस का दायरा धीरे धीरे बढ़ता ही जाएगा। ऐसे में हमें पहले से ही व्यवस्था तो करनी ही पड़ेगी। यहां बता दें कि मौजूदा समय में देश में सिर्फ 15 कंपनियां हैं जो सैनिटाइजर बना रही हैं। इसमें भारत में हिमालय ग्रुप है, जो बेंगलुरु मे हैं, इंडिया प्राइवेट लिमिटेड लाइफस्टाइल आदि शामिल हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि सभी कंपनियों को एक साथ जोड़कर उन्हें बड़े पैमाने पर मास्क तैयार कर सभी राज्यों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मास्क की समस्या

देश में मास्क बनाने वाली 55 कंपनियां हैं। इसमें अगर कंपनियों का जिक्र करें तो दिल्ली में मायापुरी में कई कंपनियां चलती हैं। इसके अलावा एसके इंटरप्राइजेज मुंबई, असल्फा बिरज, एलोनटॉप हिल मुंबई में, बालाजी मुंबई में, रिषभ स्टील्स मुंबई, ऐशिया पैशिफिक दिल्ली, नियोब्लूम बस दिल्ली में चलती है। इसके बाद अहमदाबाद, अगरा आदि में भी कंपनियां हैं। ऐसे में जिन राज्यों में कंपनियां हैं, वहां तो आसानी से मास्क पहुंच सकता है, लेकिन जहां नहीं हैं। वहां व्यवस्था कैसे होगी, इस पर केंद्र व राज्य सरकारों को विचार करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि इन कंपनियों को एकजुट करके बड़े पैमाने पर मास्क बनवाकर देशभर में वितरित किए जाएं। यह समय मुनाफा कमाने या बिजनेस चमकाने का नहीं बल्कि कोरोना को फैलने से रोकने का है, क्योंकि लोग बचेंगे तो आप बचेंगे, व्यापार बचेगा और देश बचेगा।

अस्पताल और बेड की स्थति
खतरा बढऩे पर जो एक और समस्या देश के सामने आने वाली है, वह है अस्पतालों की। भारत में यह स्थिति भी बहुत संतोषजनक नहीं है। देश में मौजूदा समय में एक हजार लोगों पर सिर्फ .65 डाक्टर हैं, जबकि जापान में यह संख्या 2.5 है। बात अगर अस्पताल की करें तो मेंमौजूदा वक्त में प्राइमरी हेल्थ सेंटर, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, सब डिवीजन हॉस्पिटल, डिस्टिक हॉस्पिटल सभी को मिला दिया जाए तो भारत में तकरीबन 37725 हॉस्पिटल हैं। इसमें जो बेड की स्थिति है वह 739024 है। इसमें उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मात्र 58 हजार बेड मौजूद हैं। वहीं बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड आदि राज्यों की हालत तो इससे भी बदतर है। ऐसे में अगर रेलवे और सेना के अस्पताल भी जोड़ दिए जो तो भी पर्याप्त बेड का अभी तक इंतजाम नहीं है। ऐसे में जरूरत है कि खतरा बढ़े उससे पहले ही प्राइवेट अस्पतालों के साथ ही बेड का वैकल्पिक इंतजाम कर लिया जाए।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं …

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