कोटा के अस्पताल में 24 दिन में 77 की मौत, सीएम बोले कोई बड़ी बात नहीं

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नई दिल्ली । राजस्थान के कोटा के अस्पताल में 24 दिन में 77 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसमें पिछले दो दिन में ही दस बच्चों की जान चली गई है। राजस्थान के सीएम से जब इस बारे में मीडियाकर्मियों ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। प्रदेश के हर अस्पताल मेें 3 से 4 की मौतें होती हैं। पूर्व में अस्पताल में मौतों का आंकड़ा इससे भी ऊपर जा चुका है। राजस्थान के सीएम के इस जवाब के बाद राज्य की सियासी पारा ऊपर चढ़ गया है।
मीडिया रपटों के मुताबिक, कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में दिसंबर में 77 से ज्यादा बच्चों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है। सिर्फ 2 दिनों में ही 10 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसमें नवजात शिशु भी शामिल हैं। अस्पताल भी इन मौतों को सामान्य बताने में जुटा हुआ है। अस्पताल का कहना है कि 2 दिनों में ही जिन 10 बच्चों की मौत हुई है, उनकी स्थिति काफी गंभीर थी और वे वेंटिलेटर पर थे। अस्पताल ने यह भी दावा किया है कि 23 और 24 दिसंबर को जिन 5 नवजात शिशुओं की मौत हुई वे सिर्फ एक दिन के थे और भर्ती करने के कुछ ही घंटों के अंदर उन्होंने आखिरी सांस ली। अस्पताल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वे हाइपॉक्सिक इस्केमिक इंसेफ्लोपैथी से पीडि़त थे।
मीडियाकर्मियों ने सीएम से पूछा था कि अस्पताल में बच्चों की जानें गई हैं, तो इसकी भरपाई कौन करेगा। इस पर जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि उनके पास आंकड़ें हैं कि बीते 6 सालों में इस साल सबसे कम जानें गई हैं। उन्होंने दावा किया कि इस साल केवल 900 मौतें हुई हैं। सीएम ने कहा कि एक भी बच्चे की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन मौतें 1400 भी हुई हैं, 1500 भी हुई हैं। इस साल तकरीबन 900 मौतें हुई हैं। सीएम ने आगे कहा, 900 भी क्यों हुई हैं, वह भी नहीं होनी चाहिए। देश-प्रदेश के अंदर हर दिन हर अस्पताल के अंदर 3-4 मौतें होती हैं। इसमें कोई नई बात नहीं है। सीएम ने कहा कि इसके लिए उन्होंने जांच कराई है और ऐक्शन भी लिया है। उन्होंने कहा कि अपनी सरकार के पिछले टर्म में भी उन्होंने ऑपरेशन थिअटर को अपग्रेड कराया था।

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