बोस के मिशन से जुड़ी अब बर्नेल

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चंद्रशेखर जोशी , हल्द्वानी
इक तारा चमका, पलभर में सदियों की रफ्तार चला। खोज में इसकी दौड़ चली, पकड़ा गया। दिल धड़का, ये तो तारों का संसार निकला। नाम था इसका पल्सर।
…करीब 50 साल पहले की बात है। ब्रह्मांड के पल्सर तारे को भौतिकशास्त्री जोसेलिन बेल बर्नेल ने खोजा था। बर्नेल को आज मूलभूत भौतिकी में विशेष ब्रेक-थ्रू के लिए पुरस्कार दिया जाएगा। हिग्स-बोसॉन की खोज करने वाले सर्न वैज्ञानिकों और हॉकिंग के बाद अब बर्नेल को दुनिया का यह विशेष पुरस्कार मिलेगा।
…बर्नेल की यह शोध यात्रा भारत के महान वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस से शुरू है। उस दौर के अइन्स्टीन और हाल के वर्षों में स्टीफन हॉकिंग ने इसे आगे बढ़ाया। ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने में ब्रेक-थ्रू तब मिला जब पता चला कि एक रहस्यमयी गति वाले तारों की तरंगें धरती पर सिग्नल भेजती हैं। इन तारों को पल्सर या न्यूट्रान तारा कहा गया। न्यूट्रान तारा ब्रह्माड की सबसे घनी वस्तु हैं। अकल्पनीय तेज रफ्तार से घूमते सुपर-डेंस न्यूट्रॉन तारों से मिले रेडियो सिग्नलों की बेल बर्नेल के नेतृत्व में 1967 में खोज हुई थी। खोज के 50 साल बाद यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड और यूनिवर्सिटी ऑफ डूंडी की वैज्ञानिक बर्नेल को आज सम्मानित किया जाना है। उन्हें तीन मिलियन डॉलर का फिजिक्स पुरस्कार दिया जाएगा।
…बेल बर्नेल ने दुनिया को बताया था कि पल्सर अत्यंत मैग्नेटाइज्ड, सुपर-डेंस सितारों का तेजी से घूमता स्वरूप है। इन्हें न्यूट्रॉन स्टार्स नाम से भी जाना गया। इस विश्लेषण ने ब्रह्मांड के कुछ सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी पदार्थों का भेद खोला। बेल बर्नेल ने 60 के दशक में जब पल्सर की खोज की तो वह ग्रेजुएट की छात्रा थीं। रेडियो टेलीस्कोप से डाटा लेते वक्त उन्होंने एक अनपेक्षित सिग्नल देखा। उन्होंने इसे अंतरिक्ष से आया सिग्नल बताया। पल्सर ऐसे सितारे हैं जो न्यूट्रॉन से भरपूर होते हैं। यह इतनी तेजी से घूम सकते हैं कि इनकी सतह प्रकाश की गति के किसी एक क्षण के भीतर बदल सकती है। पल्सर की खोज एस्ट्रोनॉमी के इतिहास में एक बड़े अचंभे के रूप में मानी जाती है।
…हाल की सबसे आकर्षक खगोलीय घटनाओं में से एक लिगो द्वारा गुरुत्व तरंगों में दो न्यूट्रॉन सितारों का संलयन देखा गया था। यह एक विद्युत चुंबकीय तरंगों का व्यापक स्पेक्ट्रम था। इस तरह के संलयन को हाइपरनोवा कहा जाता है। चूंकि पल्सर सितारे तेजी से घूमते हैं, इसलिए ये रेडियो तरंगों, दृश्य प्रकाश, एक्स-रे या गामा-रे किरणें आसमान में पहुंचते हैं। यह रेडियो उत्सर्जन का ही एक प्रकार है।
…इन सितारों की गति को ऐसे भी समझा जा सकता है कि आज सक्रिय एक पल्सर डायनासोर युग के सिर्फ एक सेकेंड की समय सीमा में धीमा हो सकता है। इन गुणों के कारण पल्सर से खगोलशास्त्रियों को हमारी आकाशगंगा और दृश्य ब्रह्मांड का नक्शा खींचने में मदद मिली। सौरमंडल के रहस्यों को समझने और तारों (ग्रहों) का स्वभाव जानने के लिए बोसॉन अणुओं से शुरू हुई यात्रा अब पल्सर की गति मापने की तैयारी कर रही है। तारों की यह खूबी उनकी अपनी ऊर्जा की ही देन है।
…ब्रह्मांड के रहस्य जानने के लिए गैलीलियो के बाद एक जबरदस्त ब्रेक-थ्रू तब मिला जब भारत के वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस ने एक कण की खोज की। इसने आधुनिक भौतिकी या कहें कि क्वांटम भौतिकी को नई दिशा दे दी। बाद में आइन्स्टीन और बोस ने मिलकर एक सिद्धांत दिया। असल में बोस का समय विज्ञान की खोजों के लिए उथल-पुथल भरा था। जर्मन भौतिकशास्त्री मैक्स प्लांक ने क्वांटम सिद्धांत दिया था। उन्होंने बताया कि ऊर्जा को छोटे-छोटे हिस्सों या पैकेटों में बांटा जा सकता है। अल्बर्ट आइंस्टीन ने सापेक्षता का सिद्धांत दिया। सत्येन्द्रनाथ बोस इन खोजों से आगे बढ़े।
…भौतिक शास्त्र में बोसॉन और फर्मियान दो प्रकार के अणु माने जाते हैं। इनमें से बोसॉन अणु की खोज सत्येन्द्र नाथ बोस के नाम पर ही है। बोस क्वांटम भौतिकी में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते हैं। उनके कार्यों की सराहना महान वैज्ञानिक आइन्स्टीन ने की और उनके साथ मिलकर कई सिद्धांत विकसित किए। दुनिया के सर्वोच्च विज्ञानियों का समूह अब क्वांटम के बाद मूलभूत भातिकी में बहुत आगे छलांग लगाने की तैयारी में है।
…पल्सर की खोज के बाद नासा और चायना के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में स्टेशन स्थापित किए। सौरमंडल के कई रहस्य मानव के सामने उजागर हुए, तारों के अद्भुत संसार की खोजें हमेशा जारी रहेंगी।

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