पृथ्वी की भीतरी सतह में हो रहा बदलाव….जानें सबसे ज्यादा किसे पहुंचा रहा है यह खतरा

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पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic field) का कमजोर होना कृत्रिम सैटेलाइट (Satellites) के लिए बना खतरा

वैज्ञानिकों के अनुसार हमारी पृथ्वी की चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की शक्ति धीरे-धीरे कम होती जा रही है और जलवायु परिवर्तन की तरह ही अब पृथ्वी की सतह के अंदर भी बदलाव हो रहे हैं। उनका मानना है कि धरती के एक बड़े हिस्से में चुंबकीय शाक्ति इतनी कमजोर हो चुकी है कि यदि उसके ऊपर से कोई विमान (Satellites) गुजरे तो उससे संपर्क स्थापित करने में अवश्य ही समस्या उत्पन्न होगी। इतना ही नहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि धरती के 3000 किलोमीटर नीचे आउटर कोर तक चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति में कमी आई है। कहा जा सकता है कि अफ्रीका से लेकर दक्षिण अमेरिका तक करीब 10000 किलोमीटर की दूरी में चुंबकीय शाक्ति कम होती जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुमानित जिस चुंबकीय ताकत को सामान्य तौर पर 32 हजार नैनोटेस्ला होना चाहिए था वह 2020 तक घटकर 24 हजार से लेकर 22 हजार तक पहुंच चुकी है। आइए आपको बताए कि इस चुंबकीय शाक्ति के कम होने से इसका धरती और हमारे कृत्रिम उपग्रहों पर क्या विपरीत असर पड़ेगा।

जर्मन शोधकर्ता जुर्गेन माट्ज्का का कहना है कि पिछले दशक में भी ऐसा प्रभाव देखा गया था, लेकिन हाल ही में यह तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही हमारे आगे चुनौती यह है कि हम कैसे समझें कि वह कौन सी प्रक्रिया है जिसकी वजह से हमारी धरती के अंदर ये बदलाव हो रहे हैं। वहीं वैज्ञानिक यूरोपीय स्पेस एजेंसी से हासिल किए गए स्वार्म सैटेलाइट समूह के आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं और वह इसे ‘साउथ एटलांटिक एनामोली’ (South Atlantic Anomaly) कह रहे है। क्योंकि यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक, यह चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की सतह के नीचे की बाह्य क्रोड़ (Outer Core) वाली  परत में बह रहे गर्म तरल लोहे के कारण बन रहा है। जोकि हमारी पृथ्वी की सतह के 3 हजार किलोमीटर नीचे है। हाल ही में हमारे वैज्ञानिकों ने पाया था कि पृथ्वी की क्रोड़ की परतें सतह की तुलना में घूमने लगी हैं। तो ऐसे में सवाल यह है कि इसका असर व्यापक रूप से किस पर होगा क्योंकि वैज्ञानिकों की मानें तो धरती के चुंबकीय क्षेत्र के कमजोर होने से यह निश्चित ही सबसे पहले हमारे उपग्रहों को प्रभावित कर सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सूर्य से आने वाली हानिकारक चुंबकीय तरगें इसी चुंबकीय क्षेत्र के कारण धरती पर नहीं पहुंच पाती है। जिसके कमजोर होने पर हमें काफी नुकसान की आंशका है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे हमारी पृथ्वी का चक्कर लगा रहे हमारे सैटेलाइट में कुछ तकनीकी खराब आने लगी है।

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